चरण 1: सबूत कैसे सुरक्षित रखें (Preserving Evidence)

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

यदि पुलिस को सूचना देने से पहले सामग्री (content) हटा दी जाती है, तो यह साबित करना कठिन हो सकता है कि अपराध हुआ था। इसलिए जो भी हुआ उसका दस्तावेजीकरण (document) करना आवश्यक है।

  • स्क्रीनशॉट लें: छवि/वीडियो, पोस्ट करने वाले व्यक्ति की प्रोफ़ाइल, तारीख और समय का स्क्रीनशॉट लें। सुनिश्चित करें कि यूज़रनेम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा हो।
  • URLs सेव करें: ब्राउज़र से सटीक लिंक (URL) कॉपी करें और उसे अपने डिवाइस के किसी सुरक्षित नोट में पेस्ट करें।
  • मैसेज डिलीट न करें: यदि आपको WhatsApp, Instagram या Telegram पर धमकी या ब्लैकमेल मिल रहा है, तो चैट को डिलीट न करें। स्क्रीनशॉट लें और हो सके तो चैट हिस्ट्री एक्सपोर्ट (export) करें।
  • स्क्रीन रिकॉर्ड करें: यदि यह कोई वीडियो या 'disappearing message' (गायब होने वाला मैसेज) है, तो अपने फोन की स्क्रीन रिकॉर्डिंग सुविधा का उपयोग करें।
चरण 2: अपने कानूनी अधिकार जानें (भारत पर केंद्रित)

भारत में, बिना सहमति वाली निजी छवियों (NCII) को साझा करना और ऑनलाइन उत्पीड़न IT अधिनियम (IT Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत एक गंभीर अपराध है।

सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000

  • धारा 66E: किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसके निजी अंगों की तस्वीरें खींचने या प्रकाशित करने पर सजा का प्रावधान।
  • धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री (obscene material) प्रकाशित या प्रसारित करने पर सजा।
  • धारा 67A: स्पष्ट यौन कृत्यों (sexually explicit acts) वाली सामग्री को प्रकाशित या प्रसारित करने के लिए सख्त सजा।

भारतीय न्याय संहिता (BNS)

  • धारा 74: महिला का शील भंग करने (outrage modesty) के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
  • धारा 77: छिपकर देखना (Voyeurism) - सहमति के बिना निजी कृत्य कर रही महिला की छवि खींचना या प्रसारित करना।
  • धारा 79: महिला के शील का अपमान करने के इरादे से शब्द, इशारा या कृत्य करना।
  • धारा 308 (जबरन वसूली/Extortion): "सेक्सटॉर्शन" (sextortion) के मामलों में बहुत आम है, जहां कोई व्यक्ति पैसे या यौन लाभ न देने पर तस्वीरें लीक करने की धमकी देता है।

इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी रूल्स 2021 (IT Rules 2021)

IT नियम 2021 के तहत, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कानूनी रूप से आवश्यक है कि पीड़ित व्यक्ति से शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर बिना सहमति की निजी तस्वीरों (NCII) या पूर्ण/आंशिक नग्नता वाली सामग्रियों को हटा दें या उनका एक्सेस ब्लॉक करें।

AI / डीपफेक (Deepfakes) पर ध्यान दें: यह कानून स्पष्ट रूप से AI द्वारा उत्पन्न या सिंथेटिक मीडिया (synthetic media) को भी कवर करता है। यदि कोई आपकी सहमति के बिना आपकी अश्लील तस्वीरें जनरेट करने के लिए AI का उपयोग करता है, तो कानून इसे असली तस्वीर के समान ही मानता है।

चरण 3: पुलिस से क्या उम्मीद करें

पुलिस शिकायत दर्ज करना कठिन लग सकता है। आपको क्या उम्मीद करनी चाहिए और किन बातों पर ज़ोर देना चाहिए:

  • गोपनीयता का अधिकार (Right to Privacy): जब आप किसी महिला का शील भंग करने (धारा 77/79 BNS) से संबंधित FIR दर्ज कराती हैं, तो पुलिस आपकी पहचान गुप्त रखने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है। आप अपनी स्टेटमेंट अनाम रूप से या सीधे किसी महिला अधिकारी को देने पर जोर दे सकती हैं।
  • साइबर क्राइम पोर्टल: राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (National Cyber Crime Reporting Portal) पर शिकायत दर्ज करके शुरुआत करना आमतौर पर तेज़ होता है। शुरुआत में इसे अनाम रूप से भी किया जा सकता है।
  • ज़ीरो एफआईआर (Zero FIR): आप किसी भी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करा सकते हैं, चाहे अपराध कहीं भी हुआ हो या अपराधी कहीं भी रहता हो। इसे Zero FIR कहा जाता है, और थाने को इसे दर्ज़ करके सही अधिकार क्षेत्र (jurisdiction) में ट्रांसफर करना होता है।